Technical Analysis in Hindi | टेक्निकल एनालिसिस क्या है

नमस्कार डियर पाठक आज के इस लेख में हम जानने वाले हैं है कि टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है, Technical Analysis in Hindi क्योंकि शेयर मार्केट में जब भी निवेश करने की बात आती है, तो निवेशक के सामने एनालिसिस की बात खड़ी हो जाती है, क्योंकि मार्केट में बिना एनालिसिस के इन्वेस्ट करना पत्थर पर सर दे मारने जैसा है। इसलिए मार्केट में जाने से पहले एनालिसिस बहुत मायने रखता है।

आपको बता दें कि मार्केट में दो तरह के मुख्य रूप से एनालिसिस होते हैं पहला फंडामेंटल एनालिसिस दूसरा टेक्निकल एनालिसिस यानी तकनीकी विश्लेषण आज के इस लेख में हम टेक्निकल एनालिसिस करना सीखेंगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं बिना किसी देरी के–

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तकनीकी विश्लेषण क्या है? What is Technical Analysis

Technical Analysis in Hindi – मार्केट एनालिसिस को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है, पहला Fundamental Analysis और दूसरा Technical Analysis तकनीकी विश्लेषण को विशेष रूप से स्टॉक मार्केट में कम समय यानी कि शॉर्ट टर्म की ट्रेडिग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आपको बता दें कि टेक्निकल एनालिसिस की हेल्प से ट्रेडर स्टॉक मार्केट में Share Price Movements, Moving Average, Trends, Trading Volume, बुल और बियर मार्केट आदि का विश्लेषण कर सकता है।

इस एनालिसिस की विधि मुख्य रूप से इक्विटी से जुड़ी हुई है, लेकिन इसका उपयोग अलग-अलग प्रतिभूतियों के लिए भी किया जाता है।

डियर पाठक फंडामेंटल एनालिसिस के मुकाबले टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग फाइनेंशियल मार्केट की चाल को आसानी से समझने के लिए किया जाता है, और आपको बता दें कि यह ऐतिहासिक वॉल्यूम और प्राइस मूवमेंट के आंकड़ों के आधार पर फाइनेंशियल मार्केट की कीमतों की डायरेक्शन को प्रिडिक्ट करने का एक मेथड है। टेक्निकल एनालिसिस से पुराने आंकड़ों के आधार पर स्टॉक के चाल का पूर्व अनुमान लगा सकते हैं। और स्टॉक के उतार चढ़ाव के चार्ट का एनालिसिस आसानी से कर सकते हैं।

फंडामेंटल एनालिसिस V/S टेक्निकल एनालिसिस

डियर पाठक आपको बता दें कि टेक्निकल एनालिसिस के अंदर ऐतिहासिक आंकड़ों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। क्योंकि टेक्निकल एनालिसिस इतिहास दोहराता है इसलिए इतना ऐतिहासिक प्राइस और वॉल्यूम के आंकड़ों के आधार पर स्टॉक के ट्रेंड का मूल्यांकन किया जा सकता है। वहीं अगर हम देखे की फंडामेंटल एनालिसिस कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और आर्थिक नीतियों बिजनेस मॉडल, मैनेजमेंट, कैपेबिलिटीज आदि पर केंद्रित होता है। फंडामेंटल एनालिसिस स्टॉक पार्टिसिपेंट द्वारा स्टॉक का एनालिसिस करने के लिए उपयोग की जाने वाली एक आम विधि है।

फंडामेंटल एनालिसिस करने का सबसे बड़ा मकसद यह है कि कोई भी इन्वेस्टर किसी कंपनी में लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करने से पहले उसके बारे में अनुमान लगा सकता है।

वहीं अगर शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर ज ट्रेडर्स की बात करें तो इनके लिए टेक्निकल एनालिसिस बेहतर माना जाता है और लॉन्ग टर्म निवेशक के लिए फंडामेंटल एनालिसिस बेहतर माना जाता है। आपको बता देगी टेक्निकल एनालिसिस और फंडामेंटल एनालिसिस दोनों का उपयोग स्टॉक की भावी कीमत के पूर्वानुमान के लिए किया जाता है, हालांकि एनालिसिस करने के लिए अलग-अलग डेटा का उपयोग किया जाता है। टेक्निकल एनालिसिस का पूरा सिद्धांत ट्रेंड्स के आसपास घूमता रहता है।

ट्रेनिंग के दौरान दर्ज होने वाली कीमतें

वह तरीके देखिए ट्रेंड्स को समझने के लिए दैनिक आधार पर कीमतों की मूवमेंट पर नजर रखी जाती है। 1 दिन के दौरान चार प्रकार की प्राइस दर्ज होती है।

  1. ओपन प्राइस – जब मार्केट ओपन होता है तो ट्रेडिंग के दौरान एग्जीक्यूटेड होने वाली पहली कीमत।
  2. हाई प्राइस – यह ट्रेडिंग डे के दौरान ट्रेड एग्जीक्यूटेड होने वाली सबसे ऊंची कीमत है।
  3. लॉ प्राइस – के ट्रेडिंग डे के दौरान सबसे कम एग्जीक्यूटेड होने वाली कीमत है।
  4. क्लोजिंग प्राइस – यह लास्ट प्राइस होती है जिसके ऊपर मार्केट बंद होता है। यह मार्केट का महत्वपूर्ण संकेत है इससे पता चलता है कि आज मार्केट में मंदी थी या तेजी इसमें ऐसा माना जाता है, कि ओपन प्राइस अगर क्लोजिंग प्राइस से कम है, तो मार्केट में तेजी थी और अगर क्लोजिंग प्राइस ओपन प्राइज से कम होती है, तो मार्केट में मंदी थी।

टेक्निकल एनालिसिस कैसे करें?

डियर पाठक वैसे तो टेक्निकल एनालिसिस के अंदर कई प्रकार से एनालिसिस किया जाता है लेकिन टेक्निकल एनालिसिस मैं दो ऐसे टूल भी शामिल है जोकि कई सारे ट्रेडर का पसंदीदा टूल माना जाता है क्योंकि इन टूल की वजह से एक ट्रेडर को मार्केट की डायरेक्शन पता चलती है कि मार्केट का Next Move क्या होने वाला है चलिए हम आपको इन टूल नाम बताते हैं

Gann Reversal – इस टूल का निर्माण Wd Gann के द्वारा किया गया था इस टूल के माध्यम से आप मार्केट की डायरेक्शन का पता लगा पाते हैं इस टूल की एक एक्सेल शीट होती है जिसके अंदर आपको मार्केट का प्राइस डालना होता है जिससे आपको कुछ लेवल मिलती है और कुछ डेट मिलती है जिसस यह समझा जाता है कि आने वाली इस डेट को मार्केट की दिशा बदलने वाली है तो आप इस टूल का इस्तेमाल मार्केट का दिशा पता करने के लिए कर सकते हैं

Fibonacci Retracement – यह टूल 1 इंडिकेटर की तरह ही काम करता है जब आप इस टूल का इस्तेमाल अपने चार्ट पर करते हो तो आपको उस चार्ट के ऊपर उसका High और उसके Low के ऊपर Fibo टूल लगाना पड़ता है अब इसके माध्यम से कुछ लेवल निकल कर आती है जिसमें 0.5 लेवल सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट होती है जब मार्केट इस लेबल से टकराता है तो मार्केट का रिवर्स होने के चांस होते हैं

टेक्निकल एनालिसिस में प्रयोग किए जाने वाले चार्ट

डियर पाठक आपको बता दें कि चार्ट के ऊपर हमने कंप्लीट आर्टिकल लिख रखा है आप उसे पढ़ सकते हैं शेयर मार्केट चार्ट कैसे समझें

लेकिन फिर भी आपकी जानकारी के लिए हम यहां पर चार्ट की बेसिक जानकारी दे रहे हैं।

1⃣ Bar Chart (बार चार्ट)

बार चार्ट का उपयोग किसी भी शेयर या इंडेक्स के पर्टिकुलर टाइम की मूवमेंट के लिए प्रयोग किया जाता है और इसको किसी भी स्टॉक या फिर कमोडिटी व फॉरेक्स शेयर के कुछ समय अवधि जैसे 15 मिनट टाइम फ्रेम एक घंटा एक दिन आदि का ओपनिंग, हाई और लॉ वह क्लोजिंग को जानने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, आपको बता दें कि टेक्निकल एनालिसिस में बार चार्ट या फिर किसी और प्रकार के चार्ट जैसे कि कैंडलेस्टिक चार्ट या लाइन चार्ट का उपयोग स्टॉक की प्राइस का मूवमेंट दिखाने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।

Bar-Chart-in-hindi

2⃣ Candlestick Chart (कैंडलेस्टिक चार्ट)

डियर पाठक Candlestick chart भी एक तरह से बार चार्ट की तरह प्राइस कि मूवमेंट को दर्शाता है। इसमें भी स्टॉक या फिर कमोडिटी व फॉरेक्स शेयर के कुछ समय अवधि जैसे 15 मिनट टाइम फ्रेम एक घंटा एक दिन आदि का ओपनिंग, हाई और लॉ वह क्लोजिंग को जानने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। जैसा कि आपको पता है बार चार्ट में स्टॉक को बार के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। और वही कैंडलेस्टिक चार्ट में स्टॉक को कैंडल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। किसी अन्य चार्ट पेटर्न से आसान कैंडलेस्टिक चार्ट और बार चार्ट को समझना है,

Bullish Market में कैंडल को हरे रंग और bearish market में कैंडल को लाल रंग से प्रदर्शित किया जाता है। कुछ सॉफ्टवेयर में bear को black candles और bullish को white candle से भी दर्शाया गया। है लेकिन मतलब दोनों का एक ही होता है।

3⃣ Line Chart (लाइन चार्ट)

लाइन चार्ट ऊपर बताए गए दोनों चार्ट से बिल्कुल अलग है हालांकि काम इसका सेम ही है लेकिन जैसा कि आपको नाम से ही प्रतीत हो रहा है इसमें लाइन है तो आपको बता दें कि इसमें स्टॉक की प्राइस मूवमेंट का आकलन करने के लिए केवल 1 लाइन को दर्शाया जाता है, लेकिन लाइन चार्ट को समझना थोड़ा कठिन है, क्योंकि यहां पर केवल लाइन के माध्यम से ही ओपन हाई और लो वह क्लोजिंग का आकलन करना पड़ता है।

4⃣ Point And Figure Chart, (पॉइंट एंड फिगर चार्ट)

आपको बता दें कि प्वाइंट एंड फिगर चार्ट बार चार्ट वह कैंडलेस्टिक चार्ट की तरह स्टॉक की प्राइस मूवमेंट को दर्शाने का एक चार्टिंग टेक्निक है। और इस टेक्निक को Hoyle नाम के लेखक ने अपनी बुक में 1898 को परिचित किया था। इसलिए इसे एक पुरानी चार्ट टेक्निक में शामिल किया गया है।

प्वाइट एंड फिगर चार्ट में टेक्नीक में zero और cross दो तरह के figure होते है। यहां zero को रेड यानी bearish market को दर्शाने के लिए उपयोग किया गया है। वहीं cross को ग्रीन यानी bullish market को दर्शाया गया है।

मुख्य बिंदु टेक्निकल एनालिसिस

  1. Bull बुल – बुल मार्केट (Bull Market) किसी फाइनेंशियल मार्केट की वह स्थिति होती है जिसमें किसी एसेट या सिक्योरिटी की कीमतें बढ़ रही होती हैं या बढ़ने की उम्मीद होती है।
  2. Bear बेयर – आने वाले समय में बाजार नीचे की तरफ जाएगा तो कहा जाता है कि आप उस स्टॉक को लेकर बेयरिश (Bearish) हैं. इसी तरह जब एक लंबे समय तक बाजार नीचे की तरफ जा रहा होता है तो कहा जाता है कि बाजार बेयर मार्केट में है
  3. Intraday – शेयर बाजार में एक दिन के अन्दर ही शेयर को खरीदते और बेचते हैं उसे Intraday Trading कहते हैं।
  4. Swing Trading – आज किसी भी स्टॉक को खरीदना और एक से ज्यादा लगभग 1 सप्ताह तक होल्ड करना और उसके बाद में sell कर देना को स्विंग ट्रेडिंग कहा जाता है।
  5. Postional trading – इसका मतलब यह है कि आज किसी भी शेयर को खरीदना और एक या अधिक से अधिक तीन महीनों तक होल्ड करना और उसके बाद में sell कर देना पोजिशनल ट्रेडिंग कहलाती है।
  6. Short Term trading – इसका मतलब यह है कि आज किसी भी शेयर को खरीदना और तीन या अधिक से अधिक 1 वर्ष तक होल्ड करना और उसके बाद में sell कर देना शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग कहलाती है।

निष्कर्ष : Technical Analysis in Hindi

डियर पाठक आज के इस आर्टिकल Technical Analysis in Hindi में हमने टेक्निकल एनालिसिस करना सीखा और आपको बताया गया है कि टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है, और स्टॉक मार्केट में यह कैसे कार्य करता है इसमें कौनसे-कौनसे चार्ट पेटर्न होते हैं और भी बहुत कुछ जो आपने अंदर पढ़ा है। और आशा करते हैं कि Technical Analysis in Hindi लेख आपको काफी नॉलेजेबल लगा होगा

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2 thoughts on “Technical Analysis in Hindi | टेक्निकल एनालिसिस क्या है”

  1. Keep up the good work Stock Patrika.

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