रिटर्न ऑन इक्विटी, What is Return on Equity in Hindi

रिटर्न ऑन इक्विटी

नमस्कार डियर पाठक आज के इस लेख में हम जानने वाले हैं की (ROE) रिटर्न ऑन इक्विटी क्या होती है, What is Return on Equity in Hindi अगर आप शेयर मार्केट में हो तो यह बेसिक बातें जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इन छोटी-छोटी चीजों से आपको पता चलता है कि मार्केट क्या है और कैसे वर्क करता है।

इसीलिए स्टॉक पत्रिका आपको मार्केट की हर एक वैसे एक बात से रूबरू करवा रहा है चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि ROE क्या है, और स्टॉक मार्केट में यह क्या कार्य करता है।

इक्विटी किसे कहते हैं जानिए हिंदी में

क्या होती है रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई)?

ROE – Return on Equity :- रिटर्न ऑन इक्विटी फाइनेंशियल परफारमेंस की एक माप (Measure) है, जिसकी गणना शेयरहोल्डर्स की इक्विटी को शुद्ध आय को विभाजित करके की जाती है। क्योंकि शेयरहोल्डर्स‌ कि इक्विटीस् के ऋण को छोड़कर कंपनी के ऐसेट के बराबर (equal) होती है। ROE को नेट ऐसेट पर रिटर्न समझा जाता है, साथ ही रिटर्न ऑन इक्विटी को शेयरधारकों की इक्विटी के संबंध में किसी कॉरपोरेशन की एक माप के रूप में समझा जाता है।

चलिए सरल भाषा में समझते हैं। ROE का मतलब इक्विटी पर रिटर्न होता है, यह दर्शाता है कि कंपनी ने शेयरधारकों के पैसे का कितनी अच्छी तरह उपयोग किया है। आरओई की गणना शुद्ध मूल्य से शुद्ध लाभ को विभाजित करके की जाती है।

सामान्यतः अगर किसी कंपनी के पास 20% से ऊपर आरओई है, तो इसे एक अच्छा इन्वेस्ट माना जाता है।

EBITDA क्या होता है और शेयर मार्केट में इसका क्या काम है

आरओई इतना महत्वपूर्ण क्यों है? Why is ROE important?

डियर पाठक रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) शेयरधारकों की इक्विटी के संबंध में किसी कॉरपारेशन की लाभप्रदता की माप करती है। उच्च वैल्यू का मतलब हे की कंपनी नए इन्वेस्टरो‌ के ऊपर अधिक कुशलता से कमा रही है। एक इन्वेस्टर के रूप में,‌ आपको शेयर खरीदने से पहले विभिन्न कंपनियों के ROE की रिसर्च और कंपैरिजन यानी तुलना करना आना चाहिए। और उन कंपनियों के लिए समय-समय पर ROE में ट्रेन्डस का रिव्यू करना भी एक अच्छा विचार है।

सभी इन्वेस्टरो सावधानी बरतने वाली एक बात है जब भी आप निवेश करें या निवेश करने की सोचें तो केवल ROE पर ही डिपेंडेंट नहीं रहे बल्कि टेक्निकल एनालिसिस, फंडामेंटल एनालिसिस और कई प्रकार के रिसर्च होती है जो आपको शेयर खरीदने से पहले करनी चाहिए

क्योंकि डियर पाठक ROE आर्टिफिशियल रूप से मैनेजमेंट द्वारा प्रभावित हो सकता है इसलिए मापदंड का यह विश्वसनीय तरीका नहीं है।‌ उदाहरण के लिए, जब शेयर कैपिटल को कम करने के लिए डेब्ट फाइनेंसिंग का उपयोग किया जाता है तब आय इस पर रहने पर भी ROE बढ़ेगा

देखिए इन्वेस्ट करने का एक सबसे अच्छा नियम है कि उन कंपनियों को टारगेट करना हैं जिनके ROE कंपीटीटर के औसत से सम्मान है या फिर उससे अधिक है। उदाहरण के लिए कोई xyz कंपनी है जो पिछले कुछ वर्षों से 18% के औसत की तुलना में 22% का स्थिर ROE बनाए रखा है।

डियर पाठक सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने के पश्चात, एक इन्वेस्टर कंक्लुजन निकालेगा की xyz कंपनी का प्रबंधन ऐसेट्स का उपयोग करने की तुलना में दूसरी कंपनियों की तुलना में बेहतर है जोकि प्रॉफिट बनाने में हेल्प करते हैं।

रिटर्न ऑन इक्विटी की गणना कैसे करें, How to Calculate Return on Equity

(ROE) रिटर्न ऑन इक्विटी को परसेंटेज के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है और इसकी की गणना किसी भी कंपनी के लिए की जा सकती है। अगर नेट इनकम और इक्विटी दोनों ही पॉजिटिव नंबर है।

शुद्ध आय की गणना सामान्य शेरहोल्डर्स को डिविडेंड pay करने से पहले और प्रेफर्ड शेरहोल्डर्स को डिविडेंड और लेनदारो को ब्याज अदा करने के बाद की जाती हैं। शुद्ध आय की राशि, शुद्ध व्यय, और टैक्स जो किसी कंपनी दिए गए समय में जनरेट करती है।

एवरेज शेरहोल्डर्स की इक्विटी की कैलकुलेशन अवधि के शुरुआत में इक्विटी को जोड़ने के जरिए की जाती है। टाइम पीरियड की शुरुआत और समाप्ति उस अवधि के साथ साथ होनी चाहिए जिस समय नेट इनकम अर्जित की जाती है।

पिछले फाइनेंशियल ईयर के दौरान कि नेट इनकम, इनकम स्टेटमेंट पर पाई जाती हैं, जो उस अवधि के टाइम फाइनेंसियल एक्टिविटी का एक योग होता है। शेरहोल्डर्स की इक्विटी, बैलेंस शीट द्वारा आ जाती है।

शेयर मार्केट से पैसे कैसे कमाए जानिए आसान तरीके

हाई (High) आरओई वाली कंपनियाँ क्या बताती हैं? What do companies with high ROE indicate?

स्टॉक मार्केट में ROE एक कंपनी के परफॉर्मेंस और प्रॉफिट की कैपेसिटी का एक इंडिकेटर है। ROE का उपयोग करके आप यह जान सकते हैं कि यह कंपनी निवेश के लिए उपयुक्त है या नहीं है।

  1. हाई ROE वाली कंपनियाँ‌ अच्छी तरीके से जानती है कि शेरहोल्डर्स के पैसों का कुशलता से यूज कैसे करें। अगर कोई कंपनी रेगुलर और लगातार टाइम टू टाइम हाई ROE प्रोड्यूस कर सकती हैं। तो ऐसी कंपनी में इन्वेस्ट करना उचित रहता है। क्योंकि ऐसी कंपनी पैसों का यूज़ बहुत ही अच्छी तरीके से करेगी जिसके कारण कंपनी का प्रॉफिट इनक्रीस होगा यानी बढ़ेगा।
  2. उच्च ROE वाली कंपनियाँ कमाई को बरकरार रखने में खरी उतरती है। और बरकरार कमाई किसी भी बिजनेस के लिए कैपिटल का एक अच्छा स्रोत है। जब कोई कंपनी अपनी कमाई को बना कर रखती हैं और फिर से कार्यशील पूंजी के रूप में ले लेती हैं, तो कंपनी को ऋण की आवश्यकता नहीं होती है, और इससे कंपनी ब्याज खर्चों से मुक्त रहेगी। एक इन्वेस्टर के रूप में प्रत्येक वर्ष कंपनी की एक्सपेक्टेड इनकम को ध्यान में रखना चाहिए। नेक्स्ट ईयर इक्विटी पर अपने रिटर्न की जांच करनी चाहिए। अगर कंपनी प्रॉफिट कमा रही है और ROE बढ़ रही हैं। तो कंपनी राजस्व पैदा कर रही है जो इस ने बनाए रखा है।
  3. हाई ROE वाली कंपनियों के पास प्रतिस्पर्धियों का एक फायदा है। वे अपने लॉन्ग टाइम प्रॉफिट की रक्षा कर सकती है। और बिना किसी प्रॉब्लम अपने मार्केट इक्विटी पर हावी हो सकती है। यह कंपनियां लॉन्ग टाइम के लिए प्रोफिट बना कर रखती हैं और अपने लाभ का पुनर्निवेश करके बता सकती है।

निष्कर्ष, रिटर्न ऑन इक्विटी क्या होती है

डियर पाठक रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) स्टॉक मार्केट में एक कंपनी के परफॉर्मेंस और प्रॉफिट की कैपेसिटी का एक इंडिकेटर है। ROE का उपयोग करके आप यह जान सकते हैं कि यह कंपनी निवेश के लिए उपयुक्त है या नहीं है। और भी बहुत कुछ जाना है हमने आज के इस लेख रिटर्न ऑन इक्विटी, What is Return on Equity in Hindi के माध्यम से, आशा करते हैं आपको रिटर्न ऑन इक्विटी का यह आर्टिकल काफी नॉलेजेबल लगा होगा। फिर भी आपका कोई सवाल है तो बेझिझक हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

error: Content is protected !!