अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्या होता है | Upper and lower Circuit Meaning

नमस्कार प्रिय पाठक आज के इस लेख में हम आपको बताने वाले हैं की अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्या होता है आपने कई बार यह लोगों के मुंह से कहते हुए सुना होगा या फिर आपने किसी न्यूज़ के माध्यम से यह जरूर सुना होगा कि आज इस xyz स्टॉक में अपर सर्किट लग गया या इस ABCD स्टॉक में लोअर सर्किट लग गया है तो आज के इस लेख में आप इतने वाले हैं कि आखिर क्यों कंपनियों के स्टॉक के ऊपर अपर ओर लोअर सर्किट लग जाते हैं

इसके पीछे की क्या वजह है आखिर क्यों लोग अपर सर्किट और लोअर सर्किट लगने के बाद उस स्टॉक को खरीद और बेच नहीं पाते हैं अपर सर्किट कौन लगाता है, अपर सर्किट क्या होता है, अपर और लोअर सर्किट कैसे तय किया जाता है और अपर सर्किट और लोअर सर्किट शेयर बाजार में क्या होता है आदि कई अपर सर्किट और लोअर सर्किट से संबंधित संपूर्ण जानकारी आपको इस लेख में मिलने वाली है

अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्या होता है

शेयर बाजार में अपर सर्किट और लोअर सर्किट को समझना बहुत ही आसान है चलिए हम आपको समझाते हैं देखिए शेयर बाजार में जितनी भी कंपनियां लिस्ट होती है उन कंपनियों के शेयर की 1 दिन में कीमत कितनी ऊपर और नीचे जा सकती है उसकी सीमा तय की जाती है

अगर किसी कंपनी का शेयर उसकी तय की गई कीमत से ज्यादा जाता है तो उसमें अपर सर्किट लग जाता है और यदि किसी कंपनी का शेयर उसकी तय की गई सीमा से नीचे जाता है तो उसमें लोअर सर्किट लग जाता है चलिए हम आपको अपर सर्किट और लोअर सर्किट को एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हैं

अपर सर्किट -Upper Circuit

उदाहरण – अप्पर सर्किट और लोअर सर्किट क्या होता है इसको समझने के लिए हमें किसी xyz कंपनी का उदाहरण लेने की आवश्यकता है मान लेते हैं की एक xyz कंपनी का शेयर प्राइस ₹100 है इससे पहले कि हम और आगे बढ़े हम आपको बता दें कि किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत की सीमा का अपर सर्किट और लोअर सर्किट 5%, 10% या फिर 20% तक होती है अब मान लेते हैं कि जो हमारे पास xyz कंपनी है उसके शेयर की सीमा 20% है मतलब की अगर इस कंपनी का शेयर प्राइस किसी दिन 20% तक ऊपर यानी ₹20 ऊपर चला जाता है तो इसके अंदर अपर सर्किट लग जाएगा

लोअर सर्किट – Lower Circuit

अब मान लेते हैं जो हमने ऊपर कितनी xyz कंपनी का उद्धरण लिया है उसकी लोअर सर्किट की सीमा भी 20% तय की गई है तो अब यह शेयर किसी एक दिन मे 20% मतलब कि ₹20 नीचे आता है तो इसमें लोअर सर्किट लग जाएगा इसे लोअर सर्किट कहते हैं

अपर सर्किट और लोअर सर्किट शेयर बाजार में क्या होता है

शेयर मार्केट में काफी सारे लोग ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग करते हैं इन लोगों के पैसों की सुरक्षा करना सेबी का काम है जिस तरह से पुलिस आपकी सेवा करती है और एक फौजी देश की सीमा पर देश की सेवा करता है वैसे ही शेयर बाजार में निवेशकों की सेवा करने के लिए भारत में सेबी की स्थापना की गई है

सेबी शेयर बाजार में निवेशकों के लिए कई सारे कड़े नियम बनाती है ताकि सारा काम आसानी से हो जाए साथ ही शेयर बाजार में भी काफी सारे शेयर में मैनिपुलेशन होता है उसकी भी देखभाल करने के लिए सेबी ने कई सारे कड़े नियम बनाए हैं और उन्हीं नियमों मैं से एक नियम है

अपर सर्किट और लोअर सर्किट काफी सारे शेयर में किसी न्यूज़ या किसी रिजल्ट को लेकर एक ही दिन में काफी ज्यादा Down Move या काफी ज्यादा Upper Move की मोमेंटम देखी जाती है और इसे रोकने के लिए सेबी ने अपर सर्किट और लोअर सर्किट का नियम बनाया है

जब किसी शेयर की कीमत उसकी देखी गई सीमा से ज्यादा चली जाती है तो उसमें अपर सर्किट लग जाता है और जब किसी शेयर की कीमत उसकी तय की गई सीमा से नीचे चली जाती है तो उसमें लोअर सर्किट लग जाता है

भारतीय शेयर बाजार की सुरक्षा करने वाली सेबी के द्वारा किसी भी शेयर के अंदर अपर सर्किट और लोअर सर्किट लगाया जाता है

अप्पर सर्किट कौन लगाता है

शेयर मार्केट में जितने भी कंपनियां लिस्ट है उन सभी कंपनियों के स्टॉक nse नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और bse मुंबई स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं अब यह शेयर बीएसई और एनएसई की वेबसाइट पर लाइव रहते हैं जिस भी शेयर की एक ऊपर और नीचे जाने की सीमा तय की गई होती है वह उस सीमा पर आते ही अपने आप बंद हो जाता है अपर सर्किट और लोअर सर्किट सेबी लगाता है

निष्कर्ष – Upper Circuit and Lower circuit Conclusion

आज के इस लेख में आपने अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्या है अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्यों लगाया जाता है इसके साथ ही आपने अपर सर्किट और लोअर सर्किट से संबंधित संपूर्ण जानकारी इस लेख में जानी है यदि आपका इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव सुझाव है तो आप हमारे साथ कमेंट बॉक्स मैं साझा कर सकते हैं इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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