Share Market Me Kitne Sector Hote Hai ऐसे जानिए

नमस्कार डियर पाठक आज के इस लेख में हम जानेंगे कि Share Market Me Kitne Sector Hote Hai क्योंकि जिस प्रकार से स्टूडेंट अपनी रुचि के हिसाब से सब्जेक्ट को चुनता है जैसे आर्ट्स या कॉमर्स, साइंस या कृषि विज्ञान कुछ भी ठीक उसी प्रकार इन्वेस्ट भी अपने हिसाब से कुछ सेक्टर में निवेश करते हैं।

इसलिए स्टॉक मार्केट में भी अलग-अलग सेक्टर होते हैं इन्वेस्टर्स इस सेक्टर में चाहे उसमें निवेश कर सकता है, इसलिए आज के इस आर्टिकल में जानेंगे कि आखिर शेयर मार्केट के कितने सेक्टर हैं, और यह कौन कौन से हैं तो इस जानकारी के लिए आप इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

शेयर मार्केट के नियम

शेयर मार्केट में ‘सेक्टर’ का क्या मतलब है

डियर पाठक भारत का स्टॉक मार्केट दिन-ब-दिन ग्रो होता जा रहा है। उदाहरण के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में 2000 से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड है। और आपको बता दें कि शेयर मार्केट में यह कंपनियां 11 सेक्टर में विभाजित है। और भारतीय स्टॉक मार्केट में कई इंडस्ट्री ग्रुप्स भी सम्मिलित हैं। स्टॉक मार्केट में इन सेक्टर्स को कंपनियों के कार्य के आधार पर बांटा जाता हैं। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं स्टॉक मार्केट के विभिन्न सेक्टरों की जानकारी।

स्टॉक्स का विभाजन

आपको बता दें कि शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने के लिए कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है कौन से सेक्टर में निवेश करने पर ज्यादा फायदा मिलेगा और किस सेक्टर में नहीं लेकिन अब स्टॉक मार्केट में हजारों कंपनियां लिस्टेड है तो इस चुनौती से निपटने के लिए स्टॉक मार्केट में कंपनियों को उनके कार्य के हिसाब से सेक्टर में शामिल कर लिया जाता है।

जैसे कि आप किसी लाइब्रेरी में गए और आपको साइंस की किताब चाहिए तो आप वहां पर आपके लिए चुनौती यह है, कि साइंस की किताब कैसे ढूंढे इसीलिए लाइब्रेरी मैनेजमेंट ने साइंस के सेक्शन पर साइंस का सेक्टर लिख दिया तो अब आपको उस किताब को ढूंढने में आसानी होगी।

ठीक उसी प्रकार स्टॉक मार्केट में भी कंपनियों को अलग-अलग सेक्टरों में बांट दिया गया है ताकि निवेशक अपनी पसंद के अनुसार शहर का चयन कर सकता है और सेक्टर की मदद से इन्वेस्टर यह जान सकता है कि उसको कौन से उद्योग या कंपनी में निवेश करना चाहिए और किस कंपनी में नहीं करना चाहिए, उदाहरण के लिए अभी ट्रैवलिंग सेक्टर में किसी महामारी की वजह से पर्यटक की कमी है तो डेफिनेटली इन्वेस्टर उस सेक्टर में निवेश नहीं करेंगे।

स्टॉक मार्केट में कौन-कौन से सेक्टर्स हैं?

Share Market Me Kitne Sector Hote Hai – वैसे तो स्टॉक मार्केट में कई सारे सेक्टर हैं लेकिन ग्लोबल इंडस्ट्री क्लासिफिकेशन स्टैंडर्ड (GICS) के अनुसार भारतीय शेयर बाजार को कुल 11 मुख्य सेक्टर्स में बांटा गया है। अब इन प्रत्येक सेक्टर्स पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे। डियर पाठक आपको बता दें कि इन सेक्टर्स मुख्य रूप से 4 समूह के अंदर या फिर चार सेक्टर के अंतर्गत डिवाइड किया गया है।

  1. डिफेंसिव सेक्टर (Defensive Sector)
  2. एवरग्रीन सेक्टर (Evergreen Sector)
  3. साइक्लिक सेक्टर (Cyclic Sector)
  4. सेंसिटिव सेक्टर (Sensitive Sector)

इकोनामी के प्रभाव और ब्याज दरों वह व्यापार चक्र आदि के हिसाब से इन सेक्टरों को 11 प्रमुख भागों में डिवाइड किया गया है, अब इन सेक्टर के बारे में हम एक-एक करके समझेंगे।

1⃣ डिफेंसिव सेक्टर (Defensive Sector)

नाम सुनने में ऐसा लगता है कि यह कोई सैन्य हत्यार बनाने वाला सेक्टर है लेकिन यह इसके बिल्कुल विपरीत है

डिफेंसिव सेक्टर के शेयर, मार्केट की सिचुएशन की परवाह किए बिना एक स्थिर आय प्रदान करते हैं, क्योंकि इन स्टॉक्स की मांग कभी नहीं बदलती है। कुछ रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए निवेशक अक्सर मंदी के दौरान मार्केट में इस सेक्टर की ओर अपना रुख करते हैं। हालांकि यह सेक्टर भले ही ज्यादा वोलेटाइल नहीं होता है मगर यह मार्केट की बढत में उतना रिटर्न नहीं देता है।

यूटिलिटी सेक्टर/ उपयोगिता सेक्टर

जो कंपनियां बिजली, पानी और नेचुरल गैस जैसी मूलभूत सुविधाएँ देती हैं इस सेक्टर के अंतर्गत आती हैं। इस क्षेत्र में उनके लिए कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, इसलिए स्थानीय सरकार इन कंपनियों और उनकी कीमतों को नियंत्रित करती है। यूटिलिटी स्टॉक सेक्टर को रक्षात्मक क्षेत्र माना जाता है। इसीलिए यह सेक्टर मार्केट की परवाह किए बिना फुल रिटर्न देते हैं।

फार्मा सेक्टर

फार्मास्युटिकल‌ कंपनियां इस सेक्टर के अंतर्गत आती है क्योंकि चाहे कोई भी मौसम हो कैसे भी सिचुएशन हो उसमें दवाओं की आवश्यकता पड़ती ही हैं इसलिए इस सेक्टर पर किसी तरह का कोई इफेक्ट नहीं पड़ता है।

कंज्युमर सेक्टर

इसमें रोज़मर्रा के उत्पाद जैसे भोजन , पेय पदार्थ और व्यक्तिगत और घरेलू उत्पाद शामिल हैं । इन वस्तुओं की मांग कभी कम नहीं होने वाली है क्योंकि ये जीवित रहने के लिए बुनियादी आवश्यकताओं के अंतर्गत आती हैं।

2⃣ एवरग्रीन सेक्टर (Evergreen Sector)

एवरग्रीन में ऐसे सेक्टर होते हैं जो भविष्य में आगे जाकर भी काम करते हैं, और खासकर इस सेक्टर के प्रोडक्ट को उनकी क्षमता और लॉन्ग टर्म तक लोगों की मांग के आधार पर डिवाइड किया जाता है, आइए देखते हैं कि स्टॉक मार्केट में कौन कौन से सेक्टर एवरग्रीन के अंदर आते हैं।

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT)

IT इंडस्ट्री सबसे तेज ग्रो हुई हैं, विशेष रुप से इंटरनेट उदाहरण के लिए आजकल हर चीज ऑनलाइन होती है चाहे वह शॉपिंग हो चाहे पेमेंट हो और यह सेक्टर अभी थमने वाला नहीं है। खासकर इस सेक्टर को ज्यादा पहचान कोविड-19 महामारी के समय मिली और अभी जिस तरह से इस टेक्नोलॉजी का यूज हो रहा है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह भविष्य में कहां जाएगी

Infrastructure सेक्टर

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर विकासशील देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विकसित देश में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने के कारण ही वह देश विकसित हैं। और अभी आप इंडिया को देख सकते हैं कि यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर लगातार बढ़ रहा है इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत राजमार्गों का निर्माण रेलवे हवाई अड्डे वह साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर आते हैं इसलिए यह सेक्टर आने वाले टाइम में केवल ग्रो करेंगे बस।

FMCG सेक्टर

Fast-moving consumer goods – सेक्टर के अंतर्गत पैकेज्ड फूड, घरेलू प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक या टॉयलेटरीज़ जैसे दैनिक आधार पर आवश्यक प्रोडक्ट्स को बनाने वाली और डिलीवर्ड के लिए रिस्पांसिबल कंपनियों को रखा जाता है क्योंकि कस्टमर को इन प्रोडक्ट की आवश्यकता 10 साल बाद भी पढ़ती ही रहेगी।

3⃣ साइक्लिक सेक्टर (Cyclic Sector)

इस सेक्टर में चक्रीय क्षेत्र सम्मिलित होते हैं जिनमें उतार-चढ़ाव अक्सर मार्केट पर निर्भर करते हैं और यह सेक्टर डिफेंसिव सेक्टर से बिल्कुल अलग है यह बहुत ही रिस्की सेक्टर होते हैं हालांकि इसमें रिटर्न भी उतना ही होता है। स्टॉक मार्केट में छोटे से बदलाव से भी यह सेक्टर बहुत प्रभावित होता है और इसके अंदर केवल दो ही सेक्टर आते हैं।

कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर

इस सेक्टर में उपभोक्ता के लिए जरूरी वस्तुएं शामिल नहीं होती है इसमें विलासिता की वस्तुएं होती है जो बुनियादी जीवन के लिए आवश्यक नहीं है उदाहरण के लिए कार, एयरलाइंस, रेस्टोरेंट होटल, आदि चीजें इसलिए आप एक निवेशक के तौर पर बुलिस मार्केट में इस सेक्टर से पैसे बना सकते हैं।

Entertainment/Media

मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को साइक्लिक सेक्टर के अंतर्गत रखा गया है क्योंकि यह जीवन की पहली प्राथमिकता नहीं है और इनकी तुरंत आवश्यकता नहीं होती है लोग अपने मन के अनुसार इनका इस्तेमाल करते हैं इसलिए मार्केट में इन स्टॉक्स में उतार चढ़ाव होता रहता है और लोग अपने हिसाब से मनोरंजन का इस्तेमाल करते हैं इसलिए कभी तेजी तो कभी मंदी होती है।

4⃣ सेंसिटिव सेक्टर (Sensitive Sector)

यह सेक्टर बदलती ब्याज दरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं और यह डिफेंसिव सेक्टर व साइक्लिक सेक्टर के मध्य आते हैं क्योंकि यह मार्केट के बदलाव से नहीं बल्कि ब्याज की दरों से इफेक्टिव होते हैं लिवरेज और ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियां सनसिटी सेक्टर के अंतर्गत आती है क्योंकि ये कंपनियां अधिकतर उधार ली गई पूंजी पर वर्क करती है, इसलिए ब्याज दर इनके कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है स्टॉक मार्केट में 3 सेक्टरों को इसके अंतर्गत रखा गया है

ऑटोमोबाइल सेक्टर

यह सेक्टर उधार ली गई पूंजी पर खरीदा गया है इसलिए इन्वेस्टर को उधार के पैसों पर ब्याज देना पड़ता है इसलिए इसमें ब्याज दर पर थोड़ी भी उतार-चढ़ाव इन्वेस्टर के मूड को चेंज कर सकती है।

कम्युनिकेशन सेक्टर

कम्युनिकेशन सेक्टर के तहत कंपनियां फोन कॉल , मैसेजिंग और इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती हैं , क्योंकि इस क्षेत्र के कामकाजी मॉडल में उच्च डिविडेंड देना शामिल है , वे अक्सर ब्याज दर पर काफी हद तक निर्भर करते हैं ।

फाइनेंशियल सेक्टर

फाइनेंशियल सेक्टर में बैंकिंग, हाउसिंग फाइनेंस, बीमा कंपनियां और कई अन्य संस्थान शामिल है। जो आपके पैसे को संभालने या संग्रहीत करने के लिए जिम्मेदार है। फाइनेंशियल सेक्टर को एवरग्रीन स्टॉक मार्केट सेक्टर के तहत रखा गया है क्योंकि लोग इन वित्तीय उत्पादों, विशेष रूप से एनबीएफसी (आवास वित्त सहित) को लोंग – टर्म इंवेस्टमेंट ऑप्शन के रूप में देखते हैं।

निष्कर्ष : Share Market Me Kitne Sector Hote Hai

अच्छा करते हैं आज का आर्टिकल Share Market Me Kitne Sector Hote Hai आपको पसंद आया होगा और आपको स्टॉक मार्केट के सेक्टर के बारे में जानने को मिला होगा अगर यह आर्टिकल आपको नॉलेजेबल लगा हो तो इसे अपना सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अवश्य शेयर करें।

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