डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है? Delivery Trading in Hindi

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?

Delivery Trading in Hindi :- नमस्कार डियर पाठक आज के लेख मे हम जानेंगे कि डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?‌ डिलीवरी ट्रेडिंग का मतलब है कि इन्वेस्टर स्टॉक को डिमैट अकाउंट में होल्ड कर सकता है। डिलीवरी ट्रेडिंग बिना कोई टाइम लिमिट के काम करता है, जिसका मतलब है कि निवेशको का जब मन चाहे वह स्टॉक को बेच सकते हैं। ट्रेडर के पास इसका पूरा अधिकार है कि वह अपने मर्जी से शेयर को होल्ड कर सकता है।

आज के इस लेख में हम बताने वाले हैं कि, डिलीवरी ट्रेडिंग क्या होती है, डिलीवरी ट्रेडिंग के रूल्स, डिलीवरी ट्रेडिंग मार्जिन, डिलीवरी ट्रेडिंग शुल्क और इसके फायदे व नुकसान। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें क्योंकि एक निवेशक के लिए यह इंफॉर्मेशन बहुत काम की होती है।

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What is Delivery Trading in Hindi, (डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?)

Delivery Trading Meaning in Hindi :- डिलीवरी ट्रेडिंग में जब निवेशक शेयर मार्केट से शेयर को खरीदते हैं। तो वह शेयर को कितने भी समय के लिए अपने डिमैट अकाउंट में होल्ड कर सकते हैं। अब निवेशक चाहे तो शेयर को खरीदने के दूसरे दिन ही बेच सकता है। और चाहे तो 10 साल के बाद भी बेच सकता है।

और आपको बता दें कि डिलीवरी ट्रेडिंग उन निवेशकों के लिए अच्छी होती हैं जो लॉन्ग टर्म (Long Term Share Investment )के लिए निवेश करना चाहते हैं,‌ और डिलीवरी ट्रेडिंग को इसलिए भी अच्छा माना जाता है क्योंकि यह इंट्राडे ट्रेडिंग की तुलना में कम रिस्की माना जाता है। और आपको पता ही है दुनिया के बड़े-बड़े इन्वेस्टर भी डिलीवरी ट्रेडिंग में विश्वास रखते हैं, जैसे स्वर्गीय श्री राकेश झुनझुनवाला, और वारेन बुफेट आदि।

डियर पाठक डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर खरीदने पर स्टॉक ब्रोकर द्वारा किसी भी प्रकार का कोई मार्जिन नहीं दिया जाता है। बल्कि ट्रेडर को उसी दाम में शेयर को खरीदना पड़ता है, जिसकी उतनी वर्तमान कीमत होती है। डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक के पास पर्याप्त रूप में धनराशि होनी चाहिए।

शेयर कैसे बेचे और खरीदें

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है? एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं- ‌ मान लीजिए आपको स्टॉक खरीदना चाहते हैं, और उसकी कीमत ₹25000 हैं तो आपके पास ₹25000 केस में होने चाहिए। और अगर आप बेचना चाहते हैं तो डिमैट अकाउंट में वह शेयर पहले से मौजूद होना चाहिए।

डिलीवरी ट्रेडिंग किस किस सेगमेंट में की जाती है

डियर पाठक डिलीवरी ट्रेडिंग निम्नलिखित सेगमेंट में की जाती है-

  1. इक्विटी
  2. फॉरेक्स
  3. कमोडिटी
  4. डेरिवेटिव्स
  5. म्यूचुअल फंड में

Delivery Trading Rules in Hindi (डिलीवरी ट्रेडिंग के नियम)

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है के बारे में तो आप जान चुके हैं, लेकिन इसके लिए कुछ नियम भी है, जिसके बारे में एक निवेशक को जानना बहुत जरूरी है क्योंकि चाहे कोई भी फील्ड हो उसके नियम मालूम होने चाहिए, ठीक उसी प्रकार डिलीवरी ट्रेडिंग है इसके नियम को ध्यान में रखने से निश्चित रूप से आपको ट्रेडिंग में फायदा मिलेगा तो आइए जानते हैं कुछ नियमों के बारे में —

  • डिलीवरी ट्रेडिंग स्टार्ट करने से पहले आप पूरी तरह से एनालिसिस और रिसर्च कर ले फिर ही आगे बढ़े।
  • आपके अकाउंट में पर्याप्त धनराशि होनी चाहिए, क्योंकि आपके अकाउंट में पर्याप्त धन नहीं है तो आप BUY और SELL नहीं कर सकते हैं।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में आप जल्दबाजी नहीं करें, हमेशा सही समय का चुनाव करे ताकि कोई लॉस ना हो।
  • आप अपना स्टॉप लॉस और टारगेट प्राइस सेट करके चले, ताकि आपका रिस्क मैनेजमेंट बना रहे।
  • गोल्डन टिप्स – हमेशा अलग-अलग कंपनियों में निवेश करना फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे आपके प्रॉफिट कमाने के ज्यादा रास्ते खुल जाते हैं।

तो यह थे कुछ डिलीवरी ट्रेडिंग के बारे में नियम और टिप्स जो आपकी ट्रेडिंग को इंप्रूवमेंट करने में मदद करेंगे। और डियर पाठक इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप एक्सपीरियंस ट्रेडर हैं या फिर न्यू ट्रेडर है, ट्रेडिंग में स्थिरता बनाए रखने के लिए आपको नियम और शर्तों को फॉलो करना ही पड़ेगा।

डिलीवरी ट्रेडिंग कैसे करे

डियर पाठक अगर आप शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहते हैं तो,‌ डिलीवरी ट्रेडिंग सबसे अच्छा ऑप्शन है, इसमें आपको लगातार मार्केट देखने की जरूरत नहीं पड़ती है, और लंबे समय बाद आप अच्छा प्रॉफिट भी कमा सकते हैं।

डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए आपके पास है डिमैट अकाउंट होना आवश्यक है, अगर आपके पास डिमैट अकाउंट नहीं है तो किसी सेबी रजिस्टर्ड ब्रोकर के पास डिमैट अकाउंट खुलवा ले।

  1. डिलीवरी बेस्ड ट्रेडिंग में, निवेशक शेयर खरीदते हैं, और उन्हें डिमैट अकाउंट में होल्ड करते हैं, कितने भी वर्ष के लिए होल्ड कर सकते हैं। 2 दिन या 10 वर्ष निर्णय आपका है।
  2. डिलीवरी ट्रेडिंग में ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आपके खाते में पर्याप्त धनराशि होना आवश्यक है।
  3. डिलीवरी ट्रेडिंग में, इंट्राडे ट्रेडिंग की तरह, उसी दिन खरीदने और बेचने की कोई बाध्यता नहीं होती है। निवेशक मैक्सिमम प्रॉफिट बनाने के लिए सही समय का इंतजार कर सकता है।
  4. अगर आप डिलीवरी ट्रेडिंग में अच्छे से एनालिसिस करते हैं, और फिर निवेश करते हैं तो निश्चित रूप से आप अच्छा प्रॉफिट ले पाएंगे। और इसमें प्लस पॉइंट यह है कि शेयर बेचने के लिए सही कीमत नहीं मिल रही है, तो आप सही समय का इंतजार कर सकते हैं

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डिलीवरी ट्रेडिंग शुल्क

डियर पाठक डिलीवरी ट्रेडिंग से जुड़े कुछ शुल्क होते हैं जिनके बारे में आपको जानना आवश्यक हैं, इसमें कुछ शुल्क फिक्स होते हैं, और कुछ अलग अलग ब्रोकर के हिसाब से तय होते हैं। चलिए जानते हैं कौनसे शुल्क लगते है, डिलीवरी ट्रेडिंग में –

  1. डिलीवरी ट्रेडिंग में सेबी द्वारा सामान्य शुल्क लगाया जाता है, जोकि बाजार पर नियंत्रण रखने या नजर रखने हेल्प करता है।
  2. वैसे कुछ ब्रोकर डिलीवरी ट्रेनिंग में किसी प्रकार का ब्रोकरेज चार्ज नहीं करते हैं, मगर फिर भी कुछ ब्रोकर डिलीवरी ट्रेडिंग में कुछ प्रतिशत ब्रोकरेज चार्ज करते हैं।
  3. GST एक अन्य शुल्क है, जो सरकार द्वारा प्रोवाइड की जाने वाली सभी सेवाओं पर लगता है, और साथ में ब्रोकर के साथ लेनदेन करने में भी GST शुल्क देना पड़ता है।
  4. इसके साथ ही STT, CTT और ट्रांजैक्शन चार्ज (Transaction Charge) भी डिलीवरी ट्रेडिंग में लगाया जाता है।
ब्रोकरशुल्क
अपस्टॉक्स0
एंजल ब्रोकिंग0
IIFL सिक्योरिटीज0.25%
ICICI डायरेक्ट0.25%
5 पैसा₹20 प्रति आर्डर

Delivery Trading Margin Kya Hota Hai

मार्जिन ट्रेडिंग में एक इन्वेस्टर को कम पैसे में अधिक शेयर खरीदने का ऑप्शन मिलता है, और डे ट्रेडिंग के अंदर यह ब्रोकर प्रोवाइड करवाता है ब्रोकर आपको कुछ मार्जिन देता है, जिससे आप कम पैसों में अधिक शेयर खरीदने में सक्षम होते हैं।

लेकिन जब बात डिलीवरी ट्रेडिंग की आती है, तो ब्रोकर अपने पैर पीछे खींच लेता है, या फिर मार्जिन ना के बराबर मिलता है। या फिर होता ही नहीं है, इसका कारण यह है कि डिलीवरी ट्रेडिंग long-term के लिए होती है जिस कारण ब्रोकर को, नुकसान होता है, इसलिए ब्रोकर डिलीवरी ट्रेडिंग पर मार्जिन नहीं देते हैं, इसके लिए आपके पास पर्याप्त धन होना आवश्यक है तभी आप डिलीवरी ट्रेडिंग कर सकते हैं।

डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे क्या है?

डियर पाठक डिलीवरी ट्रेडिंग की बढ़ती लोकप्रियता के साथ इसके कई सारे बेनिफिट्स है, आप डिलीवरी ट्रेडिग के बारे में तो परिचित हो गए होंगे, अब इसके फायदों के बारे में जानते हैं।

  • लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट:- डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक शेयर बाजार में लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट कर सकता है। और जिस कंपनी में निवेश किया है अगर उसने अच्छा परफॉर्मेंस किया है तो निवेशक को बड़ा मुनाफा मिलता है। और कंपनी खराब परफॉर्मेंस कर रही है तो निवेशक बाहर भी निकल सकता है।
  • कम रिस्क:- डिलीवरी ट्रेडिंग में एक ही दिन में स्टॉक खरीदने और बेचने की बाध्यता नहीं है, इसलिए इसमें जोखिम की संभावना कम हो जाती है, और जब इसकी तुलना अन्य सेगमेंट जैसे इंट्राडे ट्रेडिंग से करें तो यह अधिक फायदेमंद साबित होता है।
  • बोनस:- डिलीवरी ट्रेडिंग में आप स्टॉक खरीदने के बाद सभी बोनस लेने में सक्षम होते हैं। कंपनी बोनस शेयर रोलआउट करती है, तो आप उनका दावा कर सकते हैं।
  • ज्यादा प्रॉफिट:- जाहिर सी बात है आप शेयर के मालिक हैं, तो आप उन्हें सही समय तक होल्ड कर सकते हैं और फिर बेच सकते हैं। और कंपनी से भी बोनस प्राप्त करते हैं, जिस कारण आपकी आय में अधिक वृद्धि होती है।
  • कम टैक्स:- डिलीवरी ट्रेडिंग में अगर कोई 1 साल से अधिक अपनी पोजीशन होल्ड करता है, तो उसे लोंग टर्म कैपिटल गैन के अंतर्गत ₹100000 तक की राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता है।

डिलीवरी ट्रेडिंग के नुकसान

देखिए एक ट्रेडर के तौर पर आपको हर पहलू की अच्छे से जांच पड़ताल करनी चाहिए, और आपको पता है, जहां फायदा होता है वहां नुकसान भी होता है। इसलिए ट्रेडिंग करने से पहले आपको बारीकी से एनालिसिस करना चाहिए क्योंकि ट्रेडिंग का मूल मंत्र ही एनालिसिस अगर आप अंधेरे में तीर छोड़ेगे तो वह कभी भी सही निशाने पर नहीं लग पाएगा।

डिलीवरी ट्रेडिंग के नुकसान कुछ इस प्रकार है –

  • डियर पाठक डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए आपके पास पर्याप्त रूप से धनराशि उपलब्ध होनी चाहिए, तभी आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर पाएंगे।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में इंट्राडे ट्रेडिंग जैसे कोई भी मार्जिन नहीं मिलता है, यहां पर स्टॉक की पूरी कीमत चुकानी पड़ेगी।
  • और यहां तक की डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेश करने पर अच्छे रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है लेकिन अगर आप एनालिसिस करके इन्वेस्ट करते हैं तो निश्चित रहिए आपको प्रॉफिट होगा।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है जिसमें धैर्य नहीं है वह यहां पर निवेश नहीं करें क्योंकि यहां पर आपको इंसटेंट प्रॉफिट नहीं मिलेगा।

निष्कर्ष–डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है? Delivery Trading in Hindi

डियर पाठक आज के इस लेख डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है? (Delivery Trading in Hindi) में हमने डिलीवरी ट्रेडिंग के बारे में समझा और जाना। आपको बता दें कि डिलीवरी ट्रेडिंग में धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है यहां पर सारा गेम धैर्य का ही है।

आप यहां पर शेयर के खुद मालिक होते हैं। इसलिए जब चाहे आप अपने शेयर को बेच सकते हैं, 2 दिन या 2 साल या 10 साल बाद भी।

मार्जिन की बात करें तो यहां पर मार्जिन बिल्कुल नहीं मिलता है मिलता है तो भी ना के बराबर, इसलिए आप जब भी डिसीजन ले निवेश करने का तो दो बार और एनालिसिस कर ले।

आशा करते हैं आज का लेख डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है? काफी नॉलेजेबल लगा होगा अगर लेक आपको पसंद आया तो इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अवश्य शेयर करें, और डेली अपडेट पाने के लिए आप हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं।

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