फिक्स्ड डिपॉजिट क्या है | FD Kya Hai (Fixed Deposit)

FD Kya Hai

नमस्कार डियर पाठक आज के इस लेख में हम जानेंगे कि FD Kya Hai (फिक्स्ड डिपॉजिट क्या है) आपने अक्सर जब भी निवेश के बारे में सुना होगा तो अधिकतर लोग बोलते हैं कि आप फिक्स डिपाजिट में पैसा डाल दो कोई रिस्क नहीं है। यानी कि एफडी करा दो,

और अधिकतर लोग अपने पैसे को एफडी में डालना ही पसंद करते हैं क्योंकि यहां पर रिस्क कम होता है और ब्याज निश्चित दर पर मिलता है। इसलिए आपके दिमाग में भी यह सवाल आया होगा कि आखिर FD क्या होती है, FD के क्या फायदे हैं, और अपनी कैसे कर सकते हैं। अगर आप भी अपने पैसों के साथ कोई रिस्क नहीं लेना चाहते और एफडी कराना चाहते हैं तो आप इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ के सभी जानकारी हासिल कीजिए।

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Fixed Deposit Kya Hai (FD kya hai)

फिक्स्ड डिपॉजिट – FD बैंक और NBFC यानी नॉन – बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां के द्वारा प्रदान किया जाने वाला एक साधन है, जिसके माध्यम से निवेशको को एक निश्चित ब्याज दर पर बिल्कुल सुरक्षित रूप से एक निर्धारित डिपॉजिट राशि को बढ़ा सकते हैं। फिक्स डिपॉजिट एक सेफ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, फिक्स्ड डिपॉजिट निरंतर ब्याज दरों की गारंटी देता है।

और डियर पाठक सीनियर सिटीजन के लिए विशेष ब्याज दरें होती हैं और कई ब्याज भुगतान ऑप्शन प्रोवाइड किए जाते हैं, और साथ ही इनकम टैक्स कटौती की सुविधा और इसमें मार्केट संबंधी कोई भी रिस्क नहीं होता है।

FD कभी भी ब्याज दर के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होती है और साथ ही इसमें लॉक इन अवधि के बाद मैच्योरिटी पर निवेशकों को गारंटीड रिटर्न मिलते हैं। एफडी निवेशक आवधिक आधार पर या मैच्योरिटी पर अपना ब्याज प्राप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन यहां पर एक बात है निवेशक आमतौर पर एफडी में पैसा मैच्योरिटी से पहले नहीं निकाल सकते हैं, हां लेकिन एक ऑप्शन है निवेशक कुछ पेनाल्टी चार्ज का भुगतान करने के बाद इसे तोड़ सकते हैं।

Fixed Deposit (FD) की विशेषताएं और फायदे

एफडी की विशेषताएं और फायदे

  1. यहां पर यह सुनिश्चित है कि रिटर्न फिक्स्ड है और एफडी पर मार्केट के उतार-चढ़ाव का कोई प्रभाव नहीं होता है।
  2. FD में मूलधन का नुकसान और रिस्क लगभग ना के बराबर है।
  3. NBFC द्वारा प्रदान की जाने वाली FD की ब्याज दरें बैंकों की तुलना में बहुत अधिक है।
  4. FD को आसानी से और बिल्कुल सिंपल तरीके से रिन्यू किया जा सकता है, और निवेशक अपने डिपॉजिट को रिन्यू करने पर अतिरिक्त दर का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।
  5. FD डिपॉजिट पूंजी पर 75% तक लॉन भी लिया जा सकता है।
  6. डियर पाठक आपको बता दें कि आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार ब्याज आई पर स्रोत पर टैक्स काटा जाता है, अगर निवेशक की कुल आय टैक्स योग्य नहीं है तो वह फार्म 15g और सीनियर सिटीजन के लिए फॉर्म 15h संबित करके टीडीएच से बच सकते हैं।
  7. साथ ही निवेशक अपने मासिक खर्चों को मैनेज करने के लिए आवधिक ब्याज भुगतान का ऑप्शन भी चुन सकते हैं, और सीनियर सिटीजन को अधिकतर मामलों में उच्च एफडी ब्याज दरें मिलती है।

क्या ऑनलाइन एफडी की जा सकती है।

जी हां बिल्कुल आप भी ऑनलाइन एफडी में इन्वेस्ट कर सकते हैं इसके लिए मार्केट में कई सारी कंपनियां मौजूद है, हां हालांकि आपको रिसर्च करके देखना है कि कौन सी कंपनी ग्राहकों को अच्छा ब्याज देती है और किस कंपनी पर भरोसा किया जा सकता है, क्योंकि हमने मार्केट में कई कंपनियों को गोते खाते हुए देखा है हम नाम नहीं लेना चाहेंगे लेकिन पुराने क्रिकेटरों की जर्सी पर आपको वह नाम दिख जाएगा इसलिए हमारा कहने का मतलब है कि आप ऑनलाइन या ऑफलाइन जहां भी इन्वेस्ट करें सोच समझ कर करें।

ऑनलाइन एफडी के विकल्प

इसके लिए अच्छा विकल्प है बजाज फाइनेंस जो एफडी पर अच्छा खासा ब्याज प्रोवाइड करवाता है, और यहां पर आपको इन्वेस्ट करने के लिए केवल कुछ ही बुनियादी चीजों की जरूरत होती है जैसे मोबाइल नंबर से लॉगिन करने के लिए आपको ओटीपी डालना होगा,

वहीं अगर आप बजाज फाइनेंस के करंट कस्टमर है तो आप अपना विवरण पता डालकर वेरीफाई करें और इसमें नॉमिनी का विवरण दर्ज करें अगर आप नए कस्टमर है, तो पैन कार्ड या आधार कार्ड जैसे वेरीफाइड डॉक्यूमेंट अपलोड करके अपनी केवाईसी कंप्लीट कर सकते हैं।

बैंक का अकाउंट की डिटेल के साथ डिपॉजिट पूंजी, और अवधी और ब्याज भुगतान का प्रकार दर्ज करें, अब आप नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने का विकल्प चुने और आपको बता दें कि एक लाख से अधिक निवेश के लिए केवल नेट बैंकिंग का विकल्प ही अवेलेबल है। और इस प्रकार भुगतान होने के बाद आपका डिपॉजिट बुक हो जाएगा और आपको 15 मिनट के अंदर अंदर ईमेल और एसएमएस के माध्यम से बिल प्राप्त हो जाएगा। अब ठीक उसी प्रकार आप जो बैंक अच्छा ब्याज देती है और ग्राहकों का ख्याल रखती है आप उसमें भी निवेश कर सकते हैं,

जहां पर आपका बैंक का अकाउंट है आप उसी बैंक में भी एफडी करवा सकते हैं, वहां पर आप शाखा प्रबंधन से संपर्क कर सकते हैं और आपको ज्यादा डॉक्यूमेंटेशन या किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन हो सकता है थोड़ा ब्याज कम मिले

निष्कर्ष : FD Kya Hai

डियर पाठक एफडी कम क्या बिल्कुल नहीं जोखिम वाला साधन है, जहां पर आपको टेंशन लेने की ज्यादा आवश्यकता नहीं पड़ती है और नहीं रोज-रोज कोई झंझट झेलना पड़ता है, यहां पर आपने एक बार पैसा निवेश किया तो वह ऑटोमेटिकलि बढ़ता जाएगा। और भारत में ज्यादातर लोग स्टॉक मार्केट से ज्यादा एफडी पर भरोसा करते हैं। हालांकि अभी धीरे-धीरे लोगों का रुझान मार्केट के तरफ होने लगा है, अगर आप भी स्टॉक मार्केट सीखना चाहते हैं तो स्टॉक पत्रिका को फॉलो कीजिए।

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What is The Indirect Tax | इनडायरेक्ट टैक्स क्या होता है

What is The Indirect Tax

नमस्कार डियर पाठक आज की इस लेख में हम जानेंगे कि इनडायरेक्ट टैक्स क्या होता है। (What is The Indirect Tax) इकोनामी की जानकारी आपको होना बहुत जरूरी है और टैक्स के बारे में जानकारी होना और भी जरूरी है। क्योंकि टैक्स हर जगह यानी की हर बिजनेस खरीददारी या आप कुछ भी छोटा-मोटा प्रोडक्ट खरीदते हैं।

उसका भी आपको टैक्स देना पड़ता है, हर यूजर टैक्स देता है चाहे वह अमीर है या गरीब अब उसी प्रकार का यह इनडायरेक्ट टैक्स है, जिसके बारे में हम जानेंगे इस लेख में तो आप यह सामान्य जानकारी अवश्य ले और इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

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What is Indirect Tax | क्या होता है इनडायरेक्ट टैक्स

What is Indirect Tax – इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) यानी कि अप्रत्यक्ष कर डियर पाठक इनडायरेक्ट टैक्स सप्लाई चैन यानी कि आमतौर पर कोई उत्पादक रिटेलर में से किसी एक एंटीटी के द्वारा संग्रहित किया जाता है। और फिर इस कर को सरकार को भुगतान किया जाता है।

लेकिन वस्तु या सेवा की खरीद कीमत के हिस्से के रूप में इसे ग्राहक को यानी की उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है। और आखिरकार उपभोक्ता ही उत्पाद के लिए अधिक भुगतान के जरिए टैक्स देता है।

इनडायरेक्ट टैक्स को ऐसे समझिए

डायरेक्ट टैक्स की व्याख्या डायरेक्ट टैक्स के साथ कंपैरिजन करने के जरिए की जाती है। डियर पाठक इनडायरेक्ट टैक्स किसी इंडिविजुअल या एंटीटी पर टैक्सेशन के रूप में परिभाषित की जा सकती है। इनडायरेक्ट टैक्स के उदाहरण में जैसे ईंधन, शराब या अल्कोहल, सिगरेट आदि जैसे उत्पाद पर शुल्क सभी इनडायरेक्ट टैक्स के उदाहरण ही है।

वही डायरेक्ट टैक्स का उदाहरण इनकम टैक्स, क्योंकि आज अर्जित करने वाला व्यक्ति तत्काल टैक्स का भुगतान करता है। और किसी नेशनल पार्क की एडमिशन फीस डायरेक्ट टैक्सेशन का एक अन्य स्पष्ट एग्जांपल है। कुछ इनडायरेक्ट टैक्स को उपभोग टैक्स के रूप में संदर्भित किया जाता है जैसे की वैल्यू ऐडेड टैक्स (वेैट)

इनडायरेक्ट टैक्स भुगतान कौन करता है

इनडायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू कलेक्ट करने के लिए सरकार द्वारा लगाया जाता है। और मूल रुप से यह फिक्स होते हैं, जो टैक्सपेयर्स पर समान रूप से लगाया जाता है। भले ही व्यक्ति की आमदनी कितनी भी हो चाहे वह गरीब हो या फिर अमीर हो सबको इसे भुगतान करना पड़ता है। लेकिन कई लोग इसे रिग्रेसिव टैक्स मानते हैं, क्योंकि यह कम आय वाले वर्ग के लिए एक भारी बोझ के समान होता है। क्योंकि उन्हें भी टैक्स की मात्रा उतनी ही पे करनी पड़ती है जितनी अमीर आदमी करता है।

उदाहरण के लिए किसी बाहर के देश से आने वाले मोबाइल पर आयात शुल्क एक समान ही लगेगा फिर चाह सामने मोबाइल खरीदने वाला व्यक्ति अमीर हो या गरीब उसकी कमाई ज्यादा हो या कम, कहने का मतलब यह हुआ कि आदमी चाहे एक करोड़ कमाने वाला हो या ₹10000 कमाने वाला हूं उसको भी उतना ही शुल्क भुगतान करना पड़ेगा जितना 1 करोड रुपए कमाने वाले व्यक्ति को करना पड़ता है।

निष्कर्ष : What is The Indirect Tax

आपको बता दें कि इनडायरेक्ट टैक्स देश में रहने वाले हर नागरिक को चुकाना पड़ता है फिर चाहे वह अमीर हो या गरीब और इसका पता कई लोगों को आज तक नहीं है। क्योंकि हमें लगता है कि टैक्स तो सिर्फ अमीर लोग देते हैं हां यह सही है डायरेक्ट टैक्स देते हैं। लेकिन गरीब लोगों से भी टैक्स लिया जाता है।

आशा करते हैं आज का आर्टिकल What is The Indirect Tax या इनडायरेक्ट टैक्स क्या होता है आपको समझ में आया होगा ऐसे ही नॉलेजेबल जानकारी पाने के लिए आप स्टॉक पत्रिका वेबसाइट को सब्सक्राइब कीजिए

Liabilities Meaning in Hindi | लायबिलिटीज क्या होती है

Liabilities Meaning in Hindi

नमस्कार डियर पाठक, आज के इस लेख में जानेंगे कि लायबिलिटीज क्या होती है (Liabilities Meaning in Hindi) क्योंकि अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहते हैं या करते हैं तो आपको इसके बारे में जानना बेहद आवश्यक है, क्योंकि आपको पता है शेयर मार्केट में बैलेंस शीट को समझना कितना जरूरी है। बैलेंस शीट के दो महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। पहला ऐसेट और दूसरा लायबिलिटीज।

ऐसेट का मतलब होता है कोई भी वह चीज जो कंपनी को वैल्यू देती है, वही लायबिलिटीज को हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानने वाले हैं।

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What is Liabilities (Liabilities Meaning in Hindi)

Liabilities Meaning in Hindi – लायबिलिटीज का मतलब होता है देनदारियां, दायित्व, कर्जा या फिर ऋण सिंपल भाषा में कहे तो लायबिलिटीज का मतलब है कि आपके ऊपर किसी कि कोई रिस्पांसिबिलिटी है जैसे कि ऋण जो आपको किसी अन्य पक्ष को देना है। अगर इसको स्टॉक मार्केट की भाषा में समझे तो किसी कंपनी ने किसी संस्था या फिर कंपनी से लोन लिया हो तो उससे लायबिलिटीज कहते हैं और आपको बता दें कि, धन, वस्तुओं या सेवाओं सहित आर्थिक लाभों के ट्रान्सफर के जरिए समय के साथ लायबिलिटीज का सेटलमेंट हो जाता है।

डियर पाठक बैलेंस शीट पर राइट साइड में रिकॉर्ड लायबिलिटीज में लॉन, अकाउंट पेएबल, मॉर्गेज, डेफर्ड रेवेन्यू, बॉन्ड और किए गए खर्चे सम्मिलित होते हैं। लायबिलिटी एक पक्ष और दूसरे पक्ष के मध्य एक रिस्पांसिबिलिटी है। कॉमर्स की लैंग्वेज में वित्तीय बाध्यता एक दायित्व है। चलिए इसको सरल बनाने के लिए आगे हम लायबिलिटीज के प्रकार जानते हैं—

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लायबिलिटीज के प्रकार (Types of Liabilities in hindi)

डियर पाठक Liabilities के दो प्रकार होते हैं–

  1. Current liabilities (वर्तमान देनदारियां)
  2. Non current liabilities (गैर मौजूदा देनदारियां)

चलिए आगे बढ़ते हैं और विस्तार से जानते हैं लायबिलिटीज के प्रकार के बारे में।

1⃣ Current liabilities (वर्तमान देनदारियां)

Current liabilities meaning in hindi – ऐसे ऋण जिन्हें एक सीमित समय यानी कि एक वर्ष या उससे भी कम समय में चुकाना होता है, उसे ही करंट लायबिलिटीज या वर्तमान देनदारियां कहते हैं। यह एक प्रकार की शॉर्ट टर्म लायबिलिटीज भी है।

उदाहरण के लिए – स्कूल की फीस हो गई, या फिर आपने किसी रिश्तेदार से कुछ समय के लिए कर्जा लिया हो तो तो फिर वह आपके लिए एक लायबिलिटीज बन जाएगी,और जैसे कि बिजली का बिल, एंप्लोई का पेमेंट, शॉर्ट टर्म लोन आदि, करेंट लायबिलिटीज को शॉर्ट टर्म लायबिलिटीज भी कहा जाता है जिसमें अकाउंट पेएबल, इंट्रेस्ट पेएबल, इनकम टैक्स पेएबल, बैंक अकाउंट ऑवरडाफ्ट, Accrued खर्चे और शॉर्ट टर्म लॉन आदि सम्मिलित है। आइए थोड़ा इन शब्दों पर भी फोकस डाल देते हैं।

  1. अकाउंट पेएबल – यह वह बिल है जो अभी तक कंपनी द्वारा वेंडर्स को भुगतान नहीं किए गए हैं। अकाउंट पेएबल को बहुत सी कंपनियों के सबसे बड़ी करंट लायबिलिटीज मानी जाती है।
  2. इंट्रेस्ट पेएबल – ब्याज को कंपनी की बैलेंस शीट के लायबिलिटीज वाले कॉलम में दर्शाया जाता है जोकि कंपनी द्वारा ऋण आदि पर दिए गए ब्याज को प्रदर्शित करता है।
  3. इनकम टैक्स पेएबल – जैसा कि आपको पता है सरकार द्वारा हर कंपनी पर इनकम टैक्स लगाया जाता है, और अगर कोई कंपनी वित्त वर्ष के अंदर टैक्स नहीं भरती है, तो टैक्स की रकम लोंग टर्म लायबिलिटीज में वर्गीकृत कर दी जाती है।
  4. बैंक अकाउंट ऑवरडाफ्ट –डियर पाठक यह एक प्रकार का शॉर्ट टर्म लोन है, जो कि बैंकों की तरफ से प्रोवाइड करवाया जाता है।
  5. Accrued खर्चे – यह कंपनी के उन एक्सपेंस को दिखाता है जो कंपनी के द्वारा भुगतान किए जाने से पहले उसके फाइनेंशियल रिकॉर्ड में थे।

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2⃣ Non current liabilities (गैर मौजूदा देनदारियां)

Non Current Liabilities Meaning in Hindi – नॉन करंट लायबिलिटीज ऐसा कर्ज है जिसे चुकाने के लिए 1 वर्ष या उससे अधिक समय मिलता है। ज्यादा समय मिलने के कारण इसे लॉन्ग टर्म लायबिलिटीज भी कहा जाता है। और आपको बता देगी ज्यादातर कंपनियां लॉन्ग टर्म लायबिलिटीज वाला कर्जा ही लेती है। ताकि जब इस कर्जे का भुगतान करें तो उन्हें थोड़ा समय मिल जाए।

लॉन्ग टर्म लायबिलिटीज में बॉन्ड्स पेएबल, लॉन्ग टर्म लॉन्स, डेफर्ड टैक्स लायबिलिटीज, लॉन्ग टर्म लीज और डेफर्ड रेवेन्यु आदि सम्मिलित है। आइए थोड़ा इन शब्दों पर भी फोकस डाल लेते हैं।

  1. बॉन्ड्स पेएबल – आपको बता दें कि अपने फाइनेंसर स्थिति ठीक करने के लिए कंपनियां बॉन्ड्स जारी करती है, लेकिन फिर अगर खरीदारी ने वापस बेचता है तो कंपनी को बांड का पैसा वापस करना पड़ता है, और यह लगभग 1 वर्ष के लिए होता है।
  2. लॉन्ग टर्म लॉन्स – कंपनी अपने विकास और खर्चों को पूरा करने के लिए बैंक से लंबे समय के लिए लोन लेती है।
  3. डेफर्ड टैक्स लायबिलिटीज – एक निश्चित तिथि पर टैक्स भुगतान किया जाना था, लेकिन नही किया गया । इसलिए वह टैक्स डेफर्ड टैक्स लायबिलिटीज में शामिल किए गए है।
  4. लॉन्ग टर्म लीज – किसी दफ्तर या जमीन को लंबे समय के लिए लीज पर लेने के लिए भुगतान करना।
  5. डेफर्ड रेवेन्यु – वस्तुओं या सेवाओं के लिए प्राप्त किए गए फ्युचर भुगतानों पर लागू होता है, जिन्हें भविष्य में प्रदान किया जाना है।

निष्कर्ष :

डियर पाठक Liabilities लायबिलिटी को हिंदी में दायित्व कहते हैं। आसान भाषा में liability  का मतलब है कर्ज लेना। जैसे कोई अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन लेता हैं या किसी भी व्यक्ति विशेष से कर्ज लेता हैं, और किसी तरह का सामान खरीदते हैं और अगर भुगतान बाद में करते हैं तो यह लायबिलिटीज में आती है।

आज के इस लेख Liabilities Meaning in Hindi में हमने लायबिलिटीज के बारे में जाना और समझा, आशा करते हैं आपको लायबिलिटीज के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल गई होगी और अगर यह लेख आपको पसंद आया तो इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अवश्य शेयर करें।

डिजिटल गोल्ड क्या होता है, Digital Gold Kya hai in Hindi

डिजिटल गोल्ड क्या होता है?

नमस्कार डियर पाठक, आज के इस लेख में हम जानेंगे कि डिजिटल गोल्ड क्या होता है, और डिजिटल सोना कैसे खरीदें जैसा कि आपको पता है भारत में सोने में निवेश करने की पुरानी प्रथा रही है, और इसका यह भी कारण हो सकता है कि सोने में निवेश करना बहुत सुरक्षित और ज्यादा रिटर्न देने वाला माना जाता है।

अब ऐसे में इस बदलते दौर में निवेश करने के ऑप्शन भी बदले हैं, लेकिन भारत में आज भी बड़ी मात्रा में लोग सोने के अंदर इन्वेस्ट करते हैं। लेकिन अब उनके निवेश करने का तरीका भी बदल गया है। आजकल लोग डिजिटल गोल्ड में निवेश कर रहे हैं।‌ और अच्छा प्रॉफिट भी बना रहे हैं। और यह सुरक्षित तरीका भी है। इसलिए आज के लेख में हम जानेंगे कि डिजिटल गोल्ड में कैसे निवेश करें।

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डिजिटल गोल्ड क्या है? What is Digital Gold

डिजिटल गोल्ड क्या है? डिजिटल गोल्ड ऑनलाइन सोना खरीदने का तरीका है। यह न तो ज्वेलरी है,‌ नहीं कॉइन है और न म्यूचुअल फंड है, यह फिजिकल गोल्ड है, ऑनलाइन खरीदा जाता है और इसको खरीदने के बाद ग्राहक के वॉलेट में स्टोर करके रख दिया जाता है, इसे ही डिजिटल गोल्ड कहते हैं। इसको खरीदने के लिए आपको इंटरनेट और एक कि स्मार्टफोन की आवश्यकता होती है। और इसकी जो कीमत होती है, वह इंटरनेशनल कीमतों से लिंक्ड में रहती है, और इसको आप लाइव वॉच कर सकते हैं।

साथ ही आप डिजिटल गोल्ड को खरीदने के बाद इसे अपनी मर्जी से बेंच सकते हैं, इसे ट्रांसफर भी कर सकते हैं इसके अलावा इसकी फिजिकल डिलीवरी भी ले सकते हैं।

डिजिटल गोल्ड कैसे खरीदें, How to Buy Digital Gold

डिजिटल गोल्ड कैसे खरीदें :- डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए आप कई सारी ई वॉलेट कंपनियां जैसे पेटीएम, फोन पे, गूगल पे, और कुछ बैंक्स या ब्रोकिंग फर्म्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आप MMTC लिमिटेड, जो कि सबसे पुरानी कंपनी है, ऑगमेंट गोल्डटेक लिमिटेड और डिजिटल गोल्ड इंडिया (SafeGold) देसी कंपनियों का सोना डिजिटल गोल्ड के रूप में खरीद सकते हैं,

इन कंपनियों का टाई-अप PayTM, Google Pay, Amazon Pay and PhonePe जैसे अलग-अलग ई वॉलेट कंपनियों के साथ होता है, जो Digital gold को बेचने करने में मदद करती है।

डिजिटल गोल्ड को असली सोने में बदला जा सकता है।

जी हां बिल्कुल आप डिजिटल सोना खरीदने के बाद इसको असली सोने में भी बदल सकते हैं, लेकिन यहां पर आपको असली सोने में बदलने के लिए एक्स्ट्रा चार्ज का भुगतान करना होगा। सोने में निवेश करने के बाद ग्राहक सोने को बार या फिर सिक्के में बदल सकता है।

लेकिन ग्राहक अगर फिजिकल सोना मंगाता है, तो उसे सिक्के को बनवाने के लिए उसकी डिजाइन का खर्चा देना होगा, और डिजिटल गोल्ड खरीदने पर ग्राहक को 3% से ज्यादा GST का भुगतान करना पड़ेगा, और अगर ग्राहक इसको किसी प्लेटफार्म पर स्टोर करके लंबे समय के लिए रखता है तो उसे उसका भी चार्ज देना होगा।

लेकिन आपको यहां पर सावधानी रखनी चाहिए, वह इसलिए क्योंकि अभी तक कोई भी सरकारी रेगुलेटरी इसे रेगुलेट नहीं कर रही है यानी कि अगर आप म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं तो सेबी (SEBI) उसका रेगुलेटर है, बैंकों का रेगुलेटर भारतीय रिजर्व बैंक है, मगर आप डिजिटल गोल्ड खरीद रहे हैं, तो इसका भी कोई रेगुलेटर नहीं है इसलिए यह जिम्मेदारी उस प्लेटफार्म की होती हैं जिससे आप सोना खरीद रहे हैं। और इसके लिए आपसे इंश्योरेंस कवर का पैसा लिया जाता है।

निष्कर्ष: डिजिटल गोल्ड क्या होता है

डियर पाठक आप गोल्ड ₹1 में भी खरीद सकते हैं, लेकिन पहले आपको कंपनी की टर्म्स एंड कंडीशन जान लेनी चाहिए। आपको सोना फिजिकल रूप में मिलने के लिए कम से कम 5 ग्राम सोना खरीदना होगा।

बाकी आज का आर्टिकल डिजिटल गोल्ड क्या होता है आपको पसंद आया हो इस जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

बजट क्या है? बजट की परिभाषा और प्रकार की संपूर्ण जानकारी

बजट क्या है?

नमस्कार डियर पाठक आज के इस लेख में हम जानेंगे कि बजट क्या है? क्योंकि बजट के बारे में हम हर वर्ष कुछ ना कुछ सुनते हैं कि आज बजट पास हुआ है तो इस सेक्टर को इतना मिला है और इस सेक्टर को उतना मिला है,

यहां तक कि बजट तो हर घर में बनता है। लेकिन इसी बीच सवाल आता है, आखिर यह बजट क्या होता है,‌ और इसे क्यों बनाया जाता है। और भारत में बजट कब पारित होता है इन सब सवालों के जवाब जानेंगे हम इस आर्टिकल के माध्यम से।

बजट क्या है? What is Budget?

बजट, भविष्य में पैसा खर्च करने के लिए बनाई गई एक योजना की प्रक्रिया है, और इसी खर्च की योजना को बजट कहां जाता है। बजट पूरे वर्ष की राजस्व एवं अन्य कमाई तथा खर्चों का अनुमान लगाकर बनाया जाता है। देखिए बजट आय के साथ खर्चों को भी संतुलित करके चलता है जिससे कि किसी भी प्रकार का कर्ज या फिर एक्स्ट्रा खर्चा नहीं हो, इसी प्रकार सरकार भी देश चलाने के लिए बजट पेश करती है, जिसमें वित्त मंत्री के द्वारा, सरकार के समक्ष अपने खर्चों का अनुमान लगाकर, आने वाले वर्ष के लिए कई योजना बनाकर जनता के सामने हर वित्तीय वर्ष के दौरान प्रस्तुत किया जाता है‌।

एक आदर्श बजट होता है, जिसमें बिना किसी लोभ-लालच के सरकार द्वारा कुछ बजट में लोग, व्यापार, सरकार, देश बहुराष्ट्रीय संगठन, प्रति व्यक्ति, फैमिली, ग्रुप के लिए अच्छी से अच्छी स्कीम हो तथा खर्चे वे इन्वेस्ट किए गए हो।

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बजट का अर्थ एवं परिभाषा

‘बजट’ शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द ‘बजूट’(Baugette) से बना है, जिसका अर्थ होता है, ‘चमड़े का थैला’ या झोला।

इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम वर्ष 1773 में व्यंग रचना में रॉबर्ट वालपोल ( इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ) के ‘ ओपनिंग दी बजट वित्तीय योजना के विरोध किया गया।

Budget , वित्तीय आय – व्यय का वार्षिक लेखा – जोखा होता है।

बजट की परिभाषा जो विद्वानों ने दी है :-

  1. कौटिल्य के अनुसार , सारे काम वित्त पर निर्भर है । अतः सर्वाधिक ध्यान कोषागार पर देना चाहिए |
  2. लेरॉय ब्यूलियो के अनुसार , ‘ बजट एक निश्चित अवधि के अंतर्गत होने वाली अनुमानित प्राप्तियों तथा खर्चों का एक विवरण है।
  3. विलने के अनुसार , ‘ बजट अनुमानित आय तथा व्यय का विवरण , तुलनात्मक चित्रण और राजस्व एकत्र करने तथा सार्वजनिक धन खर्च करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को दिया हुआ प्राधिकार तथा निर्देश है ।

बजट के प्रकार। Types of budget in hindi

डियर पाठक आपको बता दें कि बजट के कई प्रकार होते हैं लेकिन हम दो प्रकार के बजट के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। और अन्य प्रकार के बजट के बारे में भी बताएंगे-

  1.  संतुलित बजट (Balanced Budget)
  2. असंतुलित बजट ( Unbalanced budget)

चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

1, संतुलित बजट। संतुलित बजट किसे कहते हैं Balanced budget in hindi 

ऐसा बजट जिसमें अनुमानित इनकम (रेवेन्यू) और खर्चों की राशि समान रूप से दिखाई जाती है, उसे ही संतुलित बजट कहते हैं। वाकई यह एक आइडल सिस्टम है। क्योंकि डाल्टन के अकॉर्डिंग, संतुलित बजट किसी एक टाइम पीरियड में रेवेन्यू खर्चों से कम नहीं होते हैं। संतुलित बजट में किसी भी प्रकार का घाटा या आधिक्य भी नहीं होता है।

वाकई में ऐसा स्टेज सामान्य व्यापार में देख पाना इंपॉसिबल है। वर्तमान समय में सरकार, चाहते हुए भी संतुलित बजट को नहीं बना सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि सार्वजनिक खर्चों में वृद्धि, जोकि रेवेन्यू की अपेक्षा ज्यादा होती है। इसलिए व्यवहार में बजट को संतुलित रख पाना लगभग मुश्किल है। और हम कह सकते हैं कि संतुलित बजट एक थियोरेटिकल आइडिया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार संतुलित बजट नहीं बना सकती बल्कि सरकार को ऐसी कोशिश करना चाहिए कि जितना हो सके उतना संतुलित बजट बनाएं, और सरकार इसके लिए कोशिश भी करती है और इसके परिणाम भी प्राप्त होते हैं।

असंतुलित बजट। असंतुलित बजट किसे कहते हैं? Unbalanced budget in hindi

ऐसा बजट जिसमें अनुमानित रेवेन्यू तथा खर्चे में समानता नहीं हो। कहने का मतलब ऐसा बजट जिसमें सरकार का रेवेन्यू और सरकार के खर्चों में बिल्कुल समानता नहीं होती है, उसे असंतुलित बजट कहा जाता है

डियर पाठक आपको बता दें कि असंतुलित बजट दो प्रकार का होता है-

  1. घाटे का बजट (Deficit budget)
  2. आधिक्य का बजट (surplus budget)
1, घाटे का बजट (Deficit Budget in hindi)

घाटे का बजट किसे कहते हैं? आपको बता दें कि घाटे का बजट उसे कहते हैं जब अनुमानित रेवेन्यू की तुलना में खर्चा अधिक दर्शाया जाए तो इसे घाटे का बजट कहते हैं। और इस प्रकार के घाटे को पूरा करने के लिए सरकार या तो जनता तो उतार लेती है, या फिर मुद्रा कोष का प्रयोग घाटे के बजट में करती है। और इस प्रकार घाटे का बजट सरकार की रिस्पांसिबिलिटी को बढ़ा देता है जिसके कारण मुद्रा कोष में कमी आ जाती है। और इस बजट का प्रयोग साधारण दें मंदी को दूर करने के लिए किया जाता है।

2, आधिक्य का बजट (Surplus Budget in hindi)

आधिक्य का बजट किसे कहते है? देखिए आधिक्य का बजट उसे कहा जाता है जिसमें अनुमानित रेवेन्यू की तुलना में कम खर्चे दिखाए जाते हैं। इसे ही आधिक्य का बजट कहा जाता है। आधिक्य के बजट में सरकारी ऋणों के अंदर कमी हो जाती है। और सरकार के मुद्रा कोष मे वृद्धि होती है। और जाहिर सी बात है इस प्रकार के बजट में सरकार की रिस्पांसिबिलिटी कम हो जाती है। इस प्रकार के बजट का प्रयोग किया जाता है जब इकोनामी में अतिस्फीति की स्थिति बनी हो।

अन्य प्रकार के बजट

3, सामान्य बजट (Ordinary budget in hindi)

सामान्य बजट उसे कहते हैं जिसको वार्षिक आधार पर सामान्य परिस्थितियों में बनाया जाता है। उसे सामान्य बजट कहते हैं।

4, पूंजीगत बजट (Capital budget)

5, अंतरिम बजट (Interim Budget)

बजट निर्माण के उद्देश्य (Aim of Budget in hindi)

डियर पाठक हर वर्ष के लिए सरकार पूर्व में ही योजना बना लेती है, जिसमें सरकार की इनकम के स्रोत जैसे- विभिन्न प्रकार की टैक्स वसूली, राजस्व से आय, सरकारी फीस- जुर्माना, डिविडेंड, और ब्याज आदि सभी इनकम को जनता के ऊपर खर्च करने के लिए बजट बनाना मुख्य उद्देश्य होता है।

  1. आर्थिक विकास की दर मे वृद्धि करना।
  2. गरीबी व बेरोजगारी को खत्म करना।
  3. असमानताओ को दूर कर इनकम का सही योजनाओं मे उपयोग करना।
  4. बाजार मे मूल्य व आर्थिक स्थिरता बनाये रखना।
  5. अन्य सभी क्षेत्रों रेल, बिजली, वित्त, अनाज, खाद्यपदार्थ, बैंकों के लिये भी फण्ड रखना।

बजट विवरण क्या है?

बजट विवरण एक निश्चित अवधि के लिए पूर्वनिर्धारित राजस्व और व्यय का अनुमान है। यह भविष्य की वित्तीय स्थितियों को दर्शाता है और वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।

भारत का वार्षिक बजट क्या है? (What Is India’s Annual Budget?)

भारत का केंद्रीय बजट, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण भी कहा जाता है, भारत गणराज्य का वार्षिक बजट है। सरकार इसे फरवरी के पहले दिन पेश करती है ताकि अप्रैल में नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत से पहले इसे भौतिक बनाया जा सके।

केंद्रीय बजट कौन तैयार करता है?

डियर पाठक, वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग का बजट निर्माण के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है। बजट डिवीजन सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, स्वायत्त निकायों, डिपो और रक्षा बलों को अगले साल के लिए अनुमान तैयार करने के लिए एक परिपत्र जारी करता है।

बजट के फायदे? Budget benefits?

बजट यह जानने में सक्षम बनाता है कि क्या खरीद सकते हैं और क्या नहीं, अवसरों को खरीदने और निवेश करने का लाभ उठाएं, और योजना बनाएं कि अपने कर्जे को कैसे कम किया जाए। बजट यह भी बताता है, कि अपने फंडों का अलॉटमेंट कैसे करते हैं, आपके पैसे आपके लिए कैसे काम कर रहे हैं, और आप अपने वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए कितने दूर हैं, इसके आधार पर आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है।

संविधान के आधार पर बजट,

संविधान के अनुछेद (Artical) 112 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान ,संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाते है, जिसमे सरकार के गत वर्ष के आय/प्राप्तियों व व्ययों का ब्योरा होता है।

बजट पारित करने की प्रक्रिया बजट प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों से गुजरती है

  1. बजट का प्रस्तुतीकरण।
  2. आम बहस।
  3. विभागीय समितियों द्वारा जांच।
  4. अनुदान की मांग पर मतदान।
  5. विनियोग विधेयक पर पारित होना।
  6. वित्त विधेयक का पारित होना।

निष्कर्ष, बजट क्या है?

डियर पाठक आज के इस लेख बजट क्या है? में हमने जाना कि बजट क्या होता है और बजट किस प्रकार कार्य करता है बजट कितने तरीके का होता है सरकार बजट क्यों बनाती है। अगर आप स्टॉक मार्केट में है या आना चाहते हैं तो आपको बजट के बारे में नॉलेज होना जरूरी है। शेयर मार्केट सीखना चाहते हैं या शेयर मार्केट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारी स्टॉक पत्रिका वेबसाइट के नोटिफिकेशन ऑन कर ले यह आप Allow बटन पर क्लिक करके कर सकते हैं

Trading Kya Hai (ट्रेडिंग क्या है) What is trading

Trading-Kya-Hai

Trading Kya Hai शेयर मार्केट में पैसे कमाने का एक सबसे सरल और आसान तरीका ट्रेडिंग है लेकिन जितना आसानी है लगता है उतना ही जोखिम भरा भी है यहां पर यदि कोई व्यक्ति बिना कुछ सीखें ही एंट्री ले लेता है तो उसे काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है शेयर बाजार में ट्रेडिंग के माध्यम से आप रोज पैसा कमा सकते हैं लेकिन इससे पहले आपको बहुत कुछ ट्रेडिंग से संबंधित लर्निंग सीखना आवश्यक है तभी आप यहां से पैसा कमा सकते हैं तो चलिए विस्तार से जानते हैं की ट्रेडिंग क्या है ट्रेडिंग कैसे करते हैं और ट्रेडिंग करते समय किन-किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए

Trading Kya Hai? (what is trading)

Trading शेयर बाजार से पैसा कमाने का एक ऐसा तरीका है यहां पर आप रोज 9:15 से 3:30 तक कुछ ऐसे शेयर को चुनना होता है जिनको आप कम में खरीद के ज्यादा में बेच दे और इस प्रोसेस के बीच का जो प्रॉफिट होता है,

वह आप निकाल लेते हैं ट्रेडिंग का हिंदी में मतलब व्यापार होता है भारत में ज्यादातर ट्रेडर्स इक्विटी में ट्रेड करते हैं लेकिन कई लोग फ्यूचर और ऑप्शन में भी ट्रेडिंग करते हैं ट्रेडिंग को शेयर मार्केट का सबसे रिस्की फील्ड माना जाता है

ट्रेडिंग कैसे करेंhow to trade

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने के लिए आपके पास एक डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना आवश्यक है इस डिमैट अकाउंट के माध्यम से ही आप मार्केट के अंदर ट्रेड कर सकते हैं इसके बाद आप ट्रेडिंग से संबंधित पूरी शिक्षा प्राप्त कर लेवे उसके बाद आप शेयर मार्केट के अंदर ट्रेडिंग करना शुरू कर सकते हैं,

ट्रेडिंग की शुरुआत करते समय आप हमेशा थोड़े कम पैसों के साथ में ट्रेडिंग करें और जब आपको अच्छा ट्रेडिंग से संबंधित एक्सपीरियंस हो जाए तो आप ज्यादा पैसे से शुरू कर सकते हैं।

ट्रेडिंग कैसे सीखेhow to learn trading

आपके लिए ट्रेडिंग सीखने का सबसे बेहतरीन प्लेटफॉर्म यूट्यूब है यहां पर आप ट्रेडिंग से संबंधित काफी कुछ सीख सकते हैं उसके बाद आप एक अच्छे गुरु की सहायता से ट्रेडिंग को और ज्यादा अच्छे से सीख सकते हैं

आपको ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मैं कई सारे लोग कोर्स भी भेजते हैं लेकिन आपको इनसे बचना है इनके अलावा आपको एक ऐसे गुरु की तलाश करनी है जो आपको अच्छे से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रेडिंग के बारे में बहुत कुछ सिखा सके लेकिन आप बेसिक लर्निंग यूट्यूब से भी सीख सकते हैं

ट्रेडिंग अकाउंट क्या हैwhat is trading account

जिस तरह से बैंक में अपने बचत खाते को चालू रखने के लिए उसमें थोड़ा बहुत पैसा रखना अनिवार्य होता है वैसे ही आपको एक ट्रेडिंग अकाउंट बनाने के लिए उसमें ट्रेड करना जरूरी होता है ट्रेडिंग अकाउंट आपका डिमैट अकाउंट के साथ में ही खुलता है जहां पर आप ट्रेड करते है जब आप डीमैट खाते के साथ ट्रेडिंग अकाउंट पर खोलते है

तो आपका ब्रोकर आपको मार्जिन की सुविधा देता है जिसका इस्तेमाल करके आप कम पैसों में भी ज्यादा पैसों की ट्रेडिंग कर सकते हो और इसमें जो फायदा होता है उसका कुछ हिस्सा फिर आपका ब्रोकर भी लेता है

ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती हैWhat are the types of trading

ट्रेडिंग को आप मुख्यतः तीन भागों में कर सकते हैं इस तरह से ट्रेडिंग की तीन श्रेणियां है

  • इंट्राडे ट्रेडिंग
  • स्विंग ट्रेडिंग
  • स्कैल्प इन ट्रेडिंग

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